शनिवार, 23 अप्रैल 2016

क्यूँ हम हिन्दी को अपनाने से शरम करते है?

आप शायद यक़ीन ना करे पर मुझे दिल से बहुत खुशी हो रही है के आज मै अपना पहला ब्लॉग लिखने जा रहा हू ओर वो भी अपनी भाषा मे, अपनी हिन्दी भाषा मे.


आज जिस महोल मे हम रह रहे है, पता नही क्यू, हम लोग अपनी हिन्दी भाषा को बोलने मे, उससे अपनी दिनचारिया मे अपनाने मे ओर हिन्दी लिखने मे इतना संकोच क्यूँ करते है.

जिस भाषा को बोल कर हम बड़े हुए, जिस भाषा ने हमे अपने विचार ओर अपनी बात दूसरो के सामने रखने का मोका दिया, आज उसी भाषा से हम इतना डरते है के उससे अपनाने मे हमे शरम महसूस होती है.
मैने कभी इस बात को नही माना.

मै आज इन्फर्मेशन टेक्नालजी फील्ड मे नोकरी कर रहा हू. जीयादा विस्तार मे बोलू तो इंटरनेट मार्केटिंग मे. इंटरनेट, जहा आज लाखो करोरो लोग एक दुसरे के साथ जुरे है वाहा इंग्लीश के एलवा जैसे किसी ओर भाषा का तो अस्तिताव ही नज़र नही है आज.

ये बात अलग है के आज हमारे कंप्यूटर्स ओर हमारी टेक्नालजी इतनी बेहतर हो चुकी है के हम इंग्लीश कए साथ साथ ओर भी बहुत सी भाषाओ मे इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते है. लकिन फिर भी हम जीयादा इस्तेमाल तो इंग्लीश का ही करते है. लकिन क्यूँ?

इसके बहुत से जवाब हो सकते है. एक तो ये के इंटरनेट पर जीयादतेर जानकारी इंग्लीश भाषा मे मिलती है, दूसरा करण ये की इंटरनेट पर जीयादतेर लोग इंग्लीश भाषा को जानने वाले है, तीसरा ये के हमे इंग्लीश को छोड़ कर किसी ओर भाषा को अपनाने मे शरम महसूस होती है के लोग हमे गावर ना समझ ले.

इन दोनो मे से पहले 2 तो समझ मे आते है लकिन ये अंतिम कारण के हमे कोई भाषा फिर वो चाहे हिन्दी हो या कोई ओर, अपनाने मे शरम आती है.

शरम? लकिन क्यूँ? क्या हमने पैदा होते ही किसी ओर भाषा का इस्तेमाल शुरू कर दिया था? नही ना? अगेर आप भारत मे पैदा हुए हो या कही ओर भी जहा आपने पहली बार अपनी मा को मा कह कर पुकारा था फिर क्यूँ आज आपको वोही भाषा इस्तेमाल करने मे शरम आती है.

मेरी यही कोशिश है के मै अपने लोगो मे से ये शरम निकाल स्कू ओर उन्हे  बता सकुँ  के  किसी ओर भाषा को अपनाने  मे  कोई ग़लत बात नही है लकिन उसके लिए अपने हिन्दी भाषा को खोने की कोई ज़रूरत नही है.

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