कल मुझे परिवार के साथ माता मनसा देवी मदिर ओर गुरुद्वारा श्री नाडा साहिब जाने का मोका मिला. कल यानी 24 एप्रिल 2016 को.
माता मनसा देवी मंदिर हमारे देश क माशूर शक्तिपीठ में से एक है. ये मंदिर पंचकुला, हरियाणा के पास स्थित है. मेरी बहुत बहुत मानता है माता मनसा देवी में. वैसे बोलना नही छाईए क्यूंकि कई बार अपनी ही नज़र लग जाती है पर माता मनसा देवी ने आज तक मेरी मनोकामना पूरी की. उनके साथ होने का एहसास हमेशा मेरी मजबूती बनता है.
वैसे हम ज्यादातर सुबह सुबह ही मंदिर जाते है लकिन इस बार हमने शाम को जाने का सोचा. सुबह सुबह तो हम इस लिए जाते है क्यूंकी सुबह वाहा ना तो जीयादा भीड़ होती है ओर सुबह का टाइम वैसे भी बहुत सुहावना होता है.
लकिन सच कहु तो हमारा शाम को मंदिर मे जाने का फासला सही साबित हुआ. एक तो ठंडी ठंडी ह्वा और उपर से मंदिर में जीयादा भीड़ भी नही थी. बहुत अछे से हमने दर्शन किए. माता मनसा देवी बहुत ज़्यादा सुंदर लग रही है ओर बहुत ही दिव्या भी.
दर्शन करने क बाद हमने वहां गार्डेन में कुछ देर अछे मौसम का भी आनद भी लिया ओर बाहर लगी दुकानो से विंडो शॉपिंग भी की.
उसके बाद हम गये नाडा साहिब गुरुद्वारे में . ये गुरुद्वारा भी पंचकुला के पास ही है ओर बहुत शांति महसूस होती है वहां पर. गुरुद्वारे में माथा टेक कर हमने वाहा लॅंगर भी खाया.
गुरुद्वारे का लॅंगर फिर चाहे वो कही का भी हो हमेशा बहुत ही स्वाद लगता है. माता मनसा देवी की तरह ही नाडा साहिब गुरुद्वारे मे भी बहुत ही शांति का माहूल था. ठंडी ठंडी ह्वा चल रही थी. सच में वाहा कुछ देर बैठ कर ही बहुत शांति महसूस हुई.
चलिए, धन्यवाद मेरा अनुभव पड़ने क लिए. आगे भी अगर कही हमारा जाना हुआ तो मैं पक्का पके साथ आपके साथ अपना अनुभव शेयर करुगा.
माता मनसा देवी मंदिर हमारे देश क माशूर शक्तिपीठ में से एक है. ये मंदिर पंचकुला, हरियाणा के पास स्थित है. मेरी बहुत बहुत मानता है माता मनसा देवी में. वैसे बोलना नही छाईए क्यूंकि कई बार अपनी ही नज़र लग जाती है पर माता मनसा देवी ने आज तक मेरी मनोकामना पूरी की. उनके साथ होने का एहसास हमेशा मेरी मजबूती बनता है.
वैसे हम ज्यादातर सुबह सुबह ही मंदिर जाते है लकिन इस बार हमने शाम को जाने का सोचा. सुबह सुबह तो हम इस लिए जाते है क्यूंकी सुबह वाहा ना तो जीयादा भीड़ होती है ओर सुबह का टाइम वैसे भी बहुत सुहावना होता है.
लकिन सच कहु तो हमारा शाम को मंदिर मे जाने का फासला सही साबित हुआ. एक तो ठंडी ठंडी ह्वा और उपर से मंदिर में जीयादा भीड़ भी नही थी. बहुत अछे से हमने दर्शन किए. माता मनसा देवी बहुत ज़्यादा सुंदर लग रही है ओर बहुत ही दिव्या भी.
दर्शन करने क बाद हमने वहां गार्डेन में कुछ देर अछे मौसम का भी आनद भी लिया ओर बाहर लगी दुकानो से विंडो शॉपिंग भी की.
उसके बाद हम गये नाडा साहिब गुरुद्वारे में . ये गुरुद्वारा भी पंचकुला के पास ही है ओर बहुत शांति महसूस होती है वहां पर. गुरुद्वारे में माथा टेक कर हमने वाहा लॅंगर भी खाया.
गुरुद्वारे का लॅंगर फिर चाहे वो कही का भी हो हमेशा बहुत ही स्वाद लगता है. माता मनसा देवी की तरह ही नाडा साहिब गुरुद्वारे मे भी बहुत ही शांति का माहूल था. ठंडी ठंडी ह्वा चल रही थी. सच में वाहा कुछ देर बैठ कर ही बहुत शांति महसूस हुई.
चलिए, धन्यवाद मेरा अनुभव पड़ने क लिए. आगे भी अगर कही हमारा जाना हुआ तो मैं पक्का पके साथ आपके साथ अपना अनुभव शेयर करुगा.
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